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बिल चुका फिर भी अंधेरा. मकान मालिक बनाम किरायेदार की लड़ाई में हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला

Satyakhabarindia

दिल्ली के वेस्ट इलाके से जुड़ा एक मामला हाल ही में चर्चा का विषय बना. यहां एक किरायेदार ने बकाया बिजली बिल जमा कर दिया था. इसके बावजूद उसका बिजली कनेक्शन दोबारा नहीं जोड़ा गया. मजबूर होकर किरायेदार ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट का फैसला सुनकर न सिर्फ किरायेदार बल्कि आम लोग भी हैरान रह गए.

यह मामला एक महिला किरायेदार मैकी जैन से जुड़ा है. वह साल 2016 से रजिस्टर्ड लीज डीड के तहत तीसरी मंजिल पर रह रही थीं. कुछ आर्थिक परेशानियों की वजह से सितंबर और अक्टूबर के बिजली बिल समय पर जमा नहीं हो पाए. 28 नवंबर 2025 को बिजली काट दी गई और मीटर भी हटा लिया गया. उसी दिन पूरा बकाया जमा कर दिया गया. इसके बावजूद बिजली बहाल नहीं हुई.

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बिजली कंपनी BSES राजधानी पावर लिमिटेड ने साफ कहा कि जब तक मकान मालिक से NOC नहीं मिलेगा तब तक कनेक्शन नहीं जोड़ा जाएगा. मकान मालिक ने NOC देने से इनकार कर दिया. यहीं से विवाद गहरा गया और मामला अदालत पहुंच गया.

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिनी पुष्करणा ने बेहद अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत है. यह अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन के अधिकार का हिस्सा है. अगर कोई व्यक्ति किसी प्रॉपर्टी पर कानूनी रूप से रह रहा है तो मकान मालिक और किरायेदार के विवाद के कारण उसे अंधेरे में नहीं रखा जा सकता.

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कोर्ट ने तुरंत निर्देश दिया कि तीसरी मंजिल पर बिजली सप्लाई बहाल की जाए. साथ ही यह भी साफ कर दिया कि NOC जैसी शर्तें जीवन की मूल जरूरतों के आड़े नहीं आ सकतीं.

यह फैसला लाखों किरायेदारों के लिए राहत की खबर है. यह बताता है कि कानून सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी को सुरक्षित करने के लिए है. बिजली के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अधिकार मांगने से नहीं छीनने से खत्म होते हैं.

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